गजब इंडिया: नवरात्रि में हर देवी का है अलग-अलग महत्व, जानिए इनके बारे में!

नवरात्रें शुरु हो चुके हैं, जहां देखो वहीं माता के नाम के जयकारे गूंज रहें हैं। यहां नवरात्रों की अच्छी-खासी धूम-धाम रहती है। माना जाता है कि नवरात्र में हर तिथि पर माता के एक विशेष रूप का पूजन करने से भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। देखिए मां के नौ रूप और जानिए उनके बारे में…

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माता शैलपुत्री

नवरात्र की प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा भी है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।

माता ब्रह्मचारिणी

द्वितिय तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं।

माता चंद्रघंटा

तृतीया तिथि पर माता चंद्रघंटा का पूजन होता है। यह शक्ति माता का शिवदूती स्वरूप है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।

माता कूष्मांडा

चतुर्थ तिथि को माता कूष्मांडा को पूजा जाता है। माता कूष्मांडा को रोगों को नष्ट करने वाली देवी कहा जाता है। इनकी पूजा से भक्तों को आयु, बल और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

माता स्कंदमाता

पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित है। माता को सुख- शांति का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, उनसे सैन्य संचालन की शक्ति मिलती है।

माता कात्यायनी

नवरात्रि की षष्ठम तिथि को माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी की उपासना से भक्त आलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त होता है और उसके रोग, संताप, शोक आदि नष्ट हो जाते हैं।

माता कालरात्रि

नवरात्रि की सप्तमी को माता कालरात्रि की उपासना की जाती है। मां को काल का नाश करने वाली कहा जाता है, इसीलिए उनका नाम कालरात्रि है।

माता महागौरी

श्री दुर्गा का अष्टम रूप मां महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गोरा है, इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं।

माता सिद्धिदात्री

अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री का पूजन होता है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को सभी  सिद्धियां प्रदान करती हैं।

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