गजब दर्शन: जानिए उत्तरप्रदेश के एकमात्र विश्व प्रसिद्ध दुधवा National park के बारे में

उत्तरप्रदेश का एकमात्र विश्व प्रसिद्ध दुधवा National Park है,  मोहाना व सुहेली नदियों के मध्य स्थित यह वन  प्राकृतिक रूप से रह-रहे पशु-पक्षियों एवं पेड़-पौधों की जैव-विविधता प्रकृति की अनमोल धरोहर को अपने आगोश में समेटे है। दुधवा नेशनल पार्क एवं किशनपुर पशु विहार को 1987-88 में भारत सरकार के प्रोजेक्ट टाइगर परियोजना में शामिल करने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। भारत के राष्ट्रीय पार्को में चल रहे प्रोजेक्ट टाइगर में दुधवा का नाम दूसरे स्थान पर पहुंच गया है।

Ghoomleyaar

National Park की अनूठी गैंडा पुनर्वास परियोजना

यहां पल रही विश्व की अनूठी गैंडा पुनर्वास परियोजना के 27 सदस्यीय गैंडा परिवार के स्वछंद घूमते सदस्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बने रहते हैं। इसीलिए हर साल बड़ी तादाद में सैलानी और वन्य-जीव विशेषज्ञ यहां आते हैं। करीब 884 वर्ग किमी दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में किशनपुर पशु विहार 204 वर्ग किमी एवं 680 वर्ग, किमी दुधवा नेशनल पार्क का क्षेत्रफल शामिल है ।
 
वन्य जीव- खासतौर से यह जंगल पर्यटकों व शोधार्थियों को हिरनों की पाँच प्रजातियों- चीतल, साभर, काकड़, बारहसिंहा, बाघ, तेन्दुआ, भालू, स्याही, फ़्लाइंग स्क्वैरल, हिस्पिड हेयर, बंगाल फ़्लोरिकन, हाथी,  गैन्गेटिक डाल्फ़िन, मगरमच्छ, लगभग 400 पक्षी प्रजातियां एंव रेप्टाइल्स (सरीसृप), एम्फ़ीबियन, तितिलियों के अतिरिक्त दुधवा के जंगल तमाम अज्ञात व अनदेखी प्रजातियों का घर है।
 
वनस्पति- साल, असना, बहेड़ा, जामुन, खैर के अतिरिक्त कई प्रकार के वृक्ष इस वन में मौजूद हैं। विभिन्न प्रकार की झाड़ियां, घासें, लतिकायें, औषधीय वनस्पतियां व सुन्दर पुष्पों वाली वनस्पतियों का बसेरा है दुधवा नेशनल पार्क।
 

रुकने की जगह

थारू हट- पर्यटकों के रूकने के लिए दुधवा में आधुनिक शैली में थारू हट उपलब्ध हैं।
रेस्ट हाउस- प्राचीन इण्डों-ब्रिटिश शैली की इमारते पर्यटकों को इस घने जंगल में आवास प्रदान करती है, जहाँ प्रकृति दर्शन का रोमांच दोगुना हो जाता हैं।
मचान- दुधवा के वनों में ब्रिटिश राज से लेकर आजाद भारत में बनवायें गये लकड़ी के मचान कौतूहल व रोमांच उत्पन्न करते हैं।
थारू संस्कृति- कभी राजस्थान से पलायन कर दुधवा के जंगलों में रहा यह समुदाय राजस्थानी संस्क्रुति की झलक प्रस्तुत करता है, इनके आभूषण, नृत्य, त्योहार व पारंपरिक ज्ञान अदभुत हैं, राणा प्रताप के वंशज बताने वाले इस समुदाय का इण्डों-नेपाल बार्डर पर बसने के कारण इनके संबध नेपाली समुदायों से हुए, नतीजतन अब इनमें भारत-नेपाल की मिली-जुली संस्कृति, भाषा व शारीरिक सरंचना हैं।
 
कैसे पहुंचे : दुधवा नेशनल पार्क के समीपस्थ रेलवे स्टेशन दुधवा, पलिया और मैलानी है। यहां आने के लिए दिल्ली, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर तक ट्रेन द्वारा और इसके  बाद 107 किमी सड़क यात्रा करनी पड़ती है, जबकि लखनऊ से भी पलिया-दुधवा  के लिए ट्रेन मार्ग है। सड़क मार्ग से दिल्ली-मुराबाद-बरेली-पीलीभत अथवा शाहजहांपुर, खुटार, मैलानी, भीरा, पलिया होकर दुधवा पहुंचा जा सकता है।

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