गजब Facts: संस्कृत भाषा कहां से आई? जानिए शुरू से अबतक की हर बात

संस्कृत भाषा को सदियों से देश के इतिहास से जोड़ा जाता है. आखिर, ऐसा हो भी क्यूं ना, इसे हमारे ऋषि-मुनियों, देवी-देवताओं की भाषा के तौर पर देखा जाता है. फिलहाल, देश में बीजेपी की सत्ता के आने के बाद एक बार फिर से संस्कृत पर बहस छिड़ी हुई है. ऐसे में आइए जानते हैं संस्कृत भाषा से जुड़े ऐसे फैक्ट्स जिसे आप शायद ही जानते हों-

संस्कृृत भाषा

आज के भारत से नहीं सीरिया से है संस्कृत की उत्पत्ति

भारत में आज भी करोड़ों लोगों का माना है कि संस्कृत ही हर भाषा की जननी है, साथ ही सबसे पहली भाषा के तौर पर संस्कृत ही आई थी. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारों के हवाले से छपी जानकारी के मुताबिक संस्कृत भारत देश में बाहर से आई है, जिन लोगों ने संस्कृत की छाप देश में छोड़ी है वो भारत के नहीं बल्कि उनका संबंध सीरिया से है.

मितन्नी वंश से पैदा हुई है संस्कृत?

सत्याग्रह में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इतिहासकारों का मानना है कि 1500 से 1350 ईसा पूर्व में सीरिया, इराक और तुर्की को मिलाकर एक राज्य पर मितन्नी वंश का शासन था. इस राजवंश में हर राजा का नाम संस्कृत में है.

इनमें से कई नाम है- पुरुष, सुबंधु, इंद्रोता जैसा कि नामों से साफ है कि ये सब संस्कृत के शब्द है. इस राज्य की राजधानी थी वस्सुकन्नि यानी मूल्यवान धातुओं की खान.

ऋग्वेद के साक्ष्य उत्तरी सीरिया में मिले

संस्कृत भाषा के शुरुआती साक्ष्य ऋगवेद में मिलते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक जहां पहली इसका साक्ष्य मिला वो इलाका उत्तरी सीरिया कहा जाता है.

मितन्नी राजवंश में देवताओं की पूजा

मितन्नी राजवंश में स्थानीय देवताओं के अलावा आज जिन्हें हम देवता कहते हैं उनकी भी पूजा होती थी, जैसे इंद्र देव. इसका उल्लेख है कि राजा अपनी संधि में इन देवताओं को साक्षी मानते थे.

भारत कैसे आई संस्कृत?

रिपोर्ट्स के मुताबिक क्या है आधार

  • संस्कृत भाषा का आधार प्रोटो इंडो यूरोपियन नाम की एक आदिम भाषा है
  • बाद में इसे बोलने वाले मध्य एशिया में बसे, इनमें से कुछ लोगों ने शुरुआती संस्कृत बोलना शुरू किया
  • शुरुआती संस्कृत बोलने वाले लोगों में कुछ लोग अलग होकर सीरिया की तरफ चले गए, कुछ लोग पंजाब (भारत-पाक) की तरफ पहुंचे.
  • सीरिया वाले मितन्नी राजवंश में संभवत: शामिल हुए, वहीं पंजाब की तरफ जाने वालों ने अपनी संस्कृति और भाषा बचाए रखी.
  • संभवत: आज की संस्कृत भाषा इसी की देन है.

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