'पुरुलिया कांड' आज भी एक रहस्य बना हुआ है, जब आसमान से बरसे हथियार, बम-बारूद

देश के कुछ किस्से ऐसे हैं जो सालों से रहस्य ही बनकर रह गए हैं. इन किस्सों के पीछे छिपी है, डर, दहशत और देश में चल रही राजनीतिक उठापटक की बड़ी बातें. ऐसा ही एक किस्सा है जब पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में बरसे थे हथियार, बम बारूद, आइये जानते हैं कि क्या है पुरुलिया कांड-

पुरुलिया
पुरुलिया कांड

18 दिसंबर 1995 की वो पुरुलिया की सर्द रात

18 दिसंबर 1995 की सर्द रात के बाद जब पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में लोग उठे तो कुछ लोगों को अपने खेत में बॉक्स दिखाई दिया. जब लोगों ने बॉक्स खोलकर देखा तो उसमें विस्फोटक और हथियार भरे हुए थे. जंगल की आग की तरह ये बात पूरे देश में फैल गई. कोई तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआत कह रहा था तो कोई ये कह रहा था कि भारत पर हमला होने वाला है.

रूसी जहाज से गिराए गए थे हथियार

इससे ठीक एक दिन पहले 17 सितंबर 1995 की रात को पुरुलिया में एक रूसी का फ्रेट जहाज उड़ रहा था. माल ढोने वाले इस जहाज से अत्याधुनिक हथियारों की तीन पेटियां पैराशूट से नीचे गिराई गईं.

पेटियों में 300 AK-47, 15 हजार कारतूस, 8 रॉकेट लॉन्चर, टैंक पर हमला करने वाले हथगोले, 9 MM की पिस्तौलें, नाइट विजन ग्लास सब भरे पड़े थे. फिर ये जहाज बनारस आ गया. किसी दूसरे देश से आए जहाज के यूं उड़ने को देखकर भी हड़कंप तो मचना ही था.

उस समय माहौल भी कुछ ऐसा ही था- कश्मीर में आतंकी, नॉर्थ-ईस्ट, पश्चिम बंगाल में नक्सली तबाही मचाये हुए थे.

शुरुआत में उंगली उठी आनंद मार्ग संस्था पर

पुरुलिया वाले मामले में आनंद मार्ग संस्था पर ऊंगली उठी, उसका मुख्यालय भी पुरुलिया के पास ही था ये संगठन देश में बदलाव लाने की बात कर रहा था. बंगाल के कम्यूनिस्टों से इसकी बिलकुल नहीं पटती थी.

साथ ही हथियार वाले जहाज के साथ डेनमार्क का किम डेवी आया था. इसी शख्स को पूरे कांड का मास्टरमाइंड माना जाता है. ये बंगाल में बहुत दिनों तक रहा था, बताया जाता है कि ये बंगाल में आतंक फैलाने के लिए आया था.

आनंद मार्ग संस्था से भी इसका नाम जो़ड़ा गया लेकिन कोर्ट ने आनंद मार्ग के खिलाफ बाद में कोई सबूत नहीं पाया.

कई थ्योरी सामने आई

भारत के पश्चिम बंगाल में हथियार गिराने को लेकर कई थ्योरी सामने आई, लेकिन आज तक पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सका
– हथियार कहीं और जा रहे थे गलती से भारत में गिर गए
– अमेरिका इन हथियारों को म्यांमार भेज रहा था लेकिन पुरुलिया में गिर गया
– रूस इन हथियारों को यहां भेज रहा था.
– नॉर्थ-ईस्ट के आतंकवादियों से निपटने के लिए ये हथियार भारत ने ही मंगवाए

मास्टरमाइंड डेवी का खुलासा

मास्टरमाइंड डेवी ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि

भारत सरकार ने ही ये हथियार गिरवाए जिसमें रॉ और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी भी शामिल है. उसने कहा-ये हुआ था वेस्ट बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार के आतंक से लोगों को बचाने के लिए. बंगाल में रेप और मर्डर से लोग तंग हो गये थे. मैंने तो अपनी आंखों से अपने दोस्तों को मरते देखा था. बंगाल के लिए मैंने 15 साल काम किया है.

डेवी ने ये भी कह दिया कि भारत से भागने वक्त एक सांसद ने अपनी कार में बॉर्डर क्रॉस करवाया था. नेपाल के रास्ते डेवी निकल भागा. डेनमार्क चला गया.

मास्टरमाइंड के प्रत्यर्पण में पेंच

पुरुलिया हथियार कांड के ‘मास्टरमाइंड’ आरोपी किम डेवी की गिरफ्तारी कोपेनहेगन में हो गई है लेकिन उसके प्रत्यर्पण के लिए डेनमार्क ने फिलहाल मना कर दिया है. डेवी के प्रत्यर्पण पर डेनमार्क ने भारत के सामने दो शर्तें रखी थीं. पहली कि डेवी को फांसी नहीं होगी. दूसरी कि कोई भी सजा होगी तो वो सजा डेनमार्क में ही काटेगा. बाद में डेनमार्क ने उसे भेजने से मना कर दिया.
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