रिपोर्ट: दुनिया में तीसरा सबसे अधिक मोटापा ग्रस्त लोगों वाला देश है भारत, हालात बदतर हो रहे हैं?

अबतक कुपोषण का नाम सुनते ही हमें बेहद दुबले-पतले और कमजोर दिखने वाले लोग ही याद आते हैं. ये गफलत दूर कल लीजिए, देश में मोटापा एक नए तरह के कुपोषण के रूप में आकार ले रहा है. मोटापे और कुपोषण पर इंडिया स्पेंड की ये रिपोर्ट सावधान करने वाली है-

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-YouTube)

मोटापा ग्रस्त लोगों की संख्या

रिपोर्ट के मुताबिक, लोगों की बढ़ती कमर की चौड़ाई से कुपोषण के खिलाफ भारत की लड़ाई में भी विस्तार हो रहा है. इसका मुख्य कारण बिगड़ती जीवनशैली है. भारत दुनिया में तीसरा सबसे अधिक मोटापा ग्रस्त लोगों वाला देश है. आंकड़ों पर नज़र डालें तो देश में मोटापे से ग्रस्त लोगों की कुल संख्या करीब 6 करोड़ 10 लाख हैं और संख्या हर रोज बढ़ रही है.

आमतौर पर कुपोषण, निर्बल और अल्पपोषित लोगों से जुड़ा होता है और ये आहार की भाषा में जो लोग अधिक पोषित नहीं होते हैं वो कुपोषित कहलाते हैं.

अधिक कैलोरी का क्या है मतलब?

दरअसल, यहां पर “अधिक पोषण” का मतलब कैलरी या उर्जा खपत से है. एक स्टडी बताती है कि फैट और शुगर वाले खाने और कम पोषक तत्व से ज्यादा कैलोरी लेने से मोटे लोगों में महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.

शहरी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा मोटापा

अब भारत में कुपोषण का नया चेहरा उस वर्ग से संबंधित है जो शहरी और समृद्ध हैं. जो लोग अपने आहार का चयन वहन कर सकते हैं.
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण III के मुताबिक ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्र में मोटापा ग्रस्त लोगों की संख्या तीन गुना अधिक है.

खास आंकड़े:

  • 1990 में भारत की आबादी में से 23.7 फीसदी कुपोषित थी जबकि 15.8 फीसदी जनता अधिक-पोषित थी.
  • वर्तमान में, देश की कुल आबादी में से 15.2 फीसदी कुपोषित है जबकि 22 फीसदी अधिक-पोषित

खाने की गड़बड़ी से हो रही है भारत की कमर चौड़ी

2010 में गुजरात में हुए एक स्टडी में मोटापे के शिकार लोगों और सामान्य वजन के लोगों के दैनिक आहार की तुलना की गई थी. सामान्य वजन वाले लोगों के मुकाबले अधिक वजन वाले लोग हर रोज 10 फीसदी ग्राम अधिक तेल और 20 फीसदी कम सब्जियों का सेवन कर रहे थे.

मोटापे से बीमारी तक

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बढ़े हुए बीएमआई से गैर संचारी रोग जैसे कि दिल के रोग और स्ट्रोक( 2012 में हुई मौत का प्रमुख कारण ), मधुमेह, और कुछ तरह के कैंसर का खतरा अधिक बढ़ जाता है.
ये भी पढ़ें:राजनीति में होगी एंट्री,शानदार फिल्मी सफर के हैं मालिक, विवादों में रही है जिंदगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *