पार्ट-2: बेहद ऊंचे और खूबसूरत पहाड़ों पर बसे है देवी के ये प्रसिद्ध मंदिर 

नवरात्रि शुरु होने वाले हैं ऐसे में हर जगह माता के जयकारे गुंज रहें है, लेकिन सबसे ज्यादा जयकारे अगर कहीं सुने जाते है, तो वो पहाड़ो में जहां माता के मंदिर। हम आपको देवी के ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पहाड़ों पर स्थापित हैं। जिनकी शोभा तो देखते ही बनती है और पहाड़ो पर बने होने के कारण इनका अपना एक अलग ही महत्व है। आइए जानते हैं इनके बारे में…

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मनसा देवी मंदिर, उत्तराखंड

यह मंदिर अत्यंत ही प्रसिद्ध है तथा हरिद्वार से 3 किमी की दूरी पर स्थित है। मान्यताओं के अनुसार मनसा देवी की उत्पत्ति ऋषि कश्यप के मन से हुई थी। यहां स्थापित पेड़ पर धागा बांधने से मनोकामना जरूर पूरी होती है। जिसके बाद पेड़ से एक धागा खोलने की परम्परा है।

शारदा माता मंदिर, मध्यप्रदेश

मैहर मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक छोटा सा नगर है। यह एक प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थस्थल है। मैहर में शारदा मां का प्रसिद्ध मन्दिर है, इसे देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। कहते है की यहां पर देवी सती का हार गिरा था। मैहर वाली माता मंदिर मध्यप्रदेश राज्य की त्रिकुटा पहाड़ी पर बसा है।

कनक दुर्गा मंदिर, आंध्र प्रदेश

विजयवाड़ा स्थित ‘इंद्रकीलाद्री’ नामक इस पर्वत पर निवास करने वाली माता कनक दुर्गेश्वरी का मंदिर आंध्रप्रदेश के मुख्य मंदिरों में एक है। पहाड़ी की चोटी पर बसे इस मंदिर में श्रद्धालुओं के जयघोष से समूचा वातावरण और भी आध्यात्मिक हो जाता है। यहां पहाड़ी को लेकर मान्यता है कि अर्जुन ने यहीं पर भगवान शिव की तपस्या की थी और उनसे पाशुपतास्त्र प्राप्त किया था। कहते है इस मंदिर की देवी प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी, इसलिए इसे बहुत ख़ास और शक्तिशाली माना जाता है।

तारा तारिणी मंदिर, उड़ीसा

ओडिशा में बरहामपुर शहर के पास तारा तारिणी पहाड़ी पर स्थित मंदिर सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह देवी मंदिर अपनेआप में बहुत ख़ास है क्योंकि यह मंदिर दो जुड़वां देवियों तारा और तारिणी को समर्पित है। यह मंदिर देवी सटी के 4 शक्ति पीठों के मध्य में स्थापित है, यानि इस मंदिर की चारों दिशा में एक एक शक्ति पीठ है।

सप्तश्रृंगी देवी मंदिर, महाराष्ट्र

सप्तश्रृंगी देवी नासिक से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर 4800 फुट ऊंचे सप्तश्रृंग पर्वत पर विराजित हैं। यहां की देवी मूर्ती लगभग 10 फ़ीट ऊंची है। देवी मूर्ति के 18 हाथ है. जिनसे वे अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र पकडे हुए है। यह मंदिर छोटे-बड़े सात पर्वतों से घिरा हुआ है इसलिए यहां की देवी को सप्तश्रृंगी यानी सात पर्वतों की देवी कहा जाता है।

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