म्यांमार, भारत समेत दुनियाभर में रोहिंग्या मुसलमानों पर चर्चा, आखिर क्या है मामला?कहां चले जाए रोहिंग्या?

म्यांमार में कथित तौर पर रोहिंग्या मुसलमानों के घरों को जलाए जाने और उनका कत्ल किए जाने की खबर दुनियाभर में सुर्खियों में हैं. साथ ही भारत में भी इस बात पर चर्चा है कि जो रोहिंग्या मुसलमान देश में बतौर शरणार्थी या ‘घुसपैठी’ रह रहे हैं उनका क्या किया जाना चाहिए. उन्हें निकाल देना चाहिए या उन्हें संरक्षण देना चाहिए. देश में अलग-अलग पार्टी और विचारधारा वाले लोगों का स्टैंड जुदा है. ऐसे में जानते हैं कि कौन हैं ये रोहिंग्या मुसलमान और आखिर क्यों मचा है बवाल-

फोटो: फेसबुक

रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार में क्यों है बवाल

रोहिंग्या मुसलमान दुनियाभर में अल्पसंख्यक समुदायों में से एक हैं. म्यांमार की बौद्ध आबादी से इतर महज 10 लाख ही रोहिंग्या मुसलमान हैं. माना जाता है कि ये रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी हैं ऐसे में उन्हें नागरिकता भी अबतक हासिल नहीं हुई है. म्यांमार की सरकार का आरोप है कि ये रोहिंग्या मुसलमान देश में चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं और आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं.

म्यांमार में बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं पर अत्याचार

वहीं दुनियाभर की मीडिया रिपोर्ट्स में ये दिखाया जा रहा है कि किस तरीके से म्यांमार की सरकार वहीं की बौद्ध बहुसंख्यक आबादी से मिलकर लगातार रोहिंग्या मुसलमानों का उत्पीड़न कर रही है. रखाइन स्टेट में जहां इनकी आबादी अपेक्षाकृत ज्यादा हैं वहां करीब 4-5 सालों से लगातार सांप्रदायिक हिंसा जारी है.

एक आंकड़े के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों में ही रोहिंग्या मुसलमानों के 1,200 घरों को तोड़ दिया गया. ऐसे में भारी संख्या में ये लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं, भागकर बांग्लादेश की ओर जा रहे हैं.

भागकर दूसरे देशों में जा रहे रोहिंग्या समुदाय की कदर नहीं

(फोटो: The Wire)

बड़ी संख्या में दूसरे देशों में भागकर गए रोहिंग्या मुसलमानों को वहां पर कोई अधिकार हासिल नहीं हो रहा है. 70 के दशक से ही ये मुसलमान बांग्लादेश की तरफ जा रहे हैं वहां भी उन्हें शरणार्थी शिविरों में रहना पड़ता है, उन्हें नागरिकता और एक आम नागरिक को मिलने वाली सुविधाएं तक मयस्सर नहीं है. भारत में भी रोहिंग्या मुसलमानों को खास सुविधाएं हासिल नहीं हैं.

भारत में रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 16 हजार रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं लेकिन सच्चाई है इसके करीब 3 गुना रोंहिग्या देश में बसे हुए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 40 हजार है रोहिंग्या मुसलमान देश में हैं. इनमें 7 हजार रोहिंग्या जम्मू क्षेत्र में बसे हुए हैं.

आतंरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा रोहिंग्या: सरकार

सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार ने ये साफ किया है कि रोहिंग्या मुसलमान देश के लिए ‘गंभीर खतरा’ हैं. ये भी कहा कि इनका कट्टरपंथी वर्ग भारत में बौद्ध समुदाय के खिलाफ हिंसा फैला सकता है. खुफिया एजेंसियों के हवाले से सरकार ने बताया कि इनके तार पाकिस्तान और दूसरे देशों के आतंकवादी संगठनों से जुड़े है.

कहा जाए रोहिंग्या?

ऐसे में हर तरफ रोहिंग्या समुदाय के लोगों की बात तो हो रही है लेकिन इन्हें समुचित सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश शायद नहीं की जा रही है. वो देश जो खुद को मुस्लिम समुदाय का अगुआ बताते हैं वो भी खुलकर रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करने के लिए नहीं आ रहे हैं. ऐसे में सालों से किसी जगह पर बदतर हालात में रह रहे इन मुसलमानों को अगर वहां से भी भगा दिया गया तो आखिर वो कहां जाएंगे? उनके बच्चों का भविष्य क्या होगा?
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