गजब रहस्य: जानिए क्या है इसके 'खूनी दरवाजे' का रहस्य, जिसके लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है अटेर का किला


वैसे तो भारत गढ़ और किलों की भूमी भी कही जाती है, क्योंकि यहा कई प्रसिद्ध दुर्ग और किले हैं, जो अपने आप में कई इतिहास प्रसिद्ध कहानियों को समेटे हुए हैं और समेटे हुए हैं कई रहस्यों को भी. ऐसा ही एक किला है अटेर का किला जिसके खूनी दरवाजे से हर समय खून टपकता रहता था।
मध्यप्रदेश में चंबल नदी के किनारें बसे अटेर दुर्ग की ऐतिहासिक इमारत आज भी भदावर राजाओं की शौर्यगाथाओं को बयां करती है। इस किले में शौर्य के प्रतीक लाल दरवाजे से ऐतिहासिक काल में खून टपकता था। आज भी इस दरवाजे को लेकर कई कहानियां प्रचलित है। खूनी दरवाजे का रंग भी लाल है। इस के ऊपर वह स्थान आज भी चिन्हित है जहां से खून टपकता था। लेकिन क्यों?  आइए बताते हैं क्यों…

अटेर का किला

  • अटेर का यह प्रसिद्ध किला एक मध्ययुगीन किला है. यह किला चंबल नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है जो अपनी महिमा के साथ – साथ अपनी भव्यता के लिए भी दुनियाभर में विख्यात रहा है.
  • अटेर का किला चम्बल नदी के किनारे एक ऊंचे स्थान पर स्थित है। महाभारत में जिस देवगिरि पहाड़ी का उल्लेख आता है यह किला उसी पहाड़ी पर स्तिथ है। इसका मूल नाम ‘देवगिरि दुर्ग’ है।

स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना

  • आपको बता दें इतिहास प्रसिद्ध इस किले का निर्माण भदौरिया राजा बदनसिंह ने 1664 ई. में शुरू करवाया था। भदौरिया राजाओं के नाम पर ही भिंड क्षेत्र को पहले ‘बधवार’ कहा जाता था।
  • गहरी चंबल नदी की घाटी में स्थित यह किला भिंड जिले से 35 कि.मी. पश्चिम में स्थित है। भदावर राजाओं के इतिहास में इस किले का बहुत महत्व है। यह हिन्दू और मुगल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।

खूनी दरवाजे का रहस्य

  • ‘खूनी दरवाज़ा’, ‘बदन सिंह का महल’, ‘हथियापोर’, ‘राजा का बंगला’, ‘रानी का बंगला’ और ‘बारह खंबा महल’ इस किले के मुख्य आकर्षण हैं। लेकिन इस महल की सबसे चर्चित चीज है खुनी दरवाजा, जिसमें छुपा है एक रहस्य।
  • दरअसल भदावर राजा लाल पत्थर से बने दरवाजे के ऊपर भेड़ का सिर काटकर रख देते थे, दरवाजे के नीचे एक कटोरा रख दिया जाता था। इस बर्तन में खून की बूंदें टपकती रहती थी।
  • गुप्तचर बर्तन में रखे खून से तिलक करके ही राजा से मिलने जाते थे, उसके बाद वह राजपाठ व दुश्मनों से जुड़ी अहम सूचनाएं राजा को देते थे। आम आदमी को किले के दरवाजे से बहने वाले खून के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी।
  • दरअसल इअटेर दुर्ग के ऐतिहासिक प्रवेश द्वार का निर्माण राजा महासिंह ने कराया था। इस दुर्ग की जनश्रुतियां आज भी प्रचलित है। लाल पत्थर से बना यह प्रवेश द्वार आज भी खूनी दरवाजे के नाम से प्रचलित है। यहां पर खून के निशान आज भी देखे जा सकते हैं।

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