दिलीप कुमार की सेहत ठीक नहीं है, उनके बचपन से सुपरस्टार बनने तक के सफर की खास बातें

ट्रैजडी किंग दिलीप कुमार साहब की तबीयत एक बार खराब हो गई, जिसकी वजह से उन्हें 2 अगस्त की रात को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. Dilip Kumar ने बड़े पर्दे पर कई किरदार तो ऐसे निभाएं हैं जिन्हें आज भी देख लो तो आंखों से आंसू निकल जाएं. ऐसे में जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी हर खास बात

पाकिस्तान में हुआ था दिलीप साहब का जन्म

भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में Dilip Kumar के चाहने वाले हैं. आपको बता दें कि दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर 1922 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था.Dilip Kumar के पिता लाला गुलाम सरवर एक कारोबारी थे. जो कारोबार के सिलसिले में मुंबई आ गए थे और 1930 में लाला गुलाम सरवर का पूरा परिवार मुंबई आकर रहने लगा था.

दिलीप कुमार
मां के साथ दिलीप कुमार

Dilip Kumar के घर के आर्थिक हालात बिगड़ने लगे

लाला गुलाम सरवर के परिवार में उनकी पत्नी और 7 बच्चे थे. घर में सिर्फ लाला गुलाम सरवर ही कमाई करने वाले शख्स थे. ब्रिटिश इंडिया के उस काल में लाला गुलाम का कारोबार ठीक नहीं चल रहा था.Dilip Kumar उस समय किशोर थे और उनकी बड़ी बहनों की शादी भी करनी थी ऐसे में Dilip Kumar अपने पिता की मदद के लिए कोई रोजगार की तलाश में थे.

पिता की डांट की वजह से घर छोड़ा

कारोबार सही नहीं चल रहा था इसी बीच Dilip Kumar के पिता ने उनको कुछ कह दिया. जो दिलीप को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा और Dilip Kumar ने खफा होकर घर छोड़ दिया. मुंबई से वो पुणे आ गए. दिलीप ने ये मन बना लिया की बिना रोजगार हासिल किए घर नहीं जाना है. पुना वो इसलिए आए क्योंकि यहां उन्हें या उनके पिता को जानने वाला कोई नहीं था.

अंग्रेजी, फारसी, उर्दू के जानकार थे दिलीप कुमार

कुमार अंग्रेजी, फारसी और उर्दू भाषा के अच्छे जानकार थे. यही कारण था कि उन्हें खुद पर भरोसा था कि उन्हें रोजगार मिल जाएगा. पुना आने के बाद Dilip Kumarएक ईरानी रेस्त्रां गए वहां Dilip Kumar ने रेस्त्रां के मालिक से उसी की भाषा में यानी फारसी भाषा में बात की जिससे वो बहुत प्रभावित हुआ.

रेस्त्रां में हासिल की पहली नौकरी

ईरानी रेस्त्रां के मालिक ने कुमार को दूसरे एंग्लो इंडियन रेस्त्रां के मालिक से मिलने को कहा. कुमार उससे मिले, दिलीप की अंग्रेजी से वो बहुत प्रभावित हुआ और फिर उसने Dilip Kumar को कैंटीन के ठेकेदार ताज मुहम्मद के पास भेजा. जहां उन्हें अपनी पहली नौकरी मिली.

सैंडविच ने दिलाई दिलीप कुमार को शोहरत

एक दिन कैंटीन का शेफ काम पर नहीं आया था, और उसी दिन कोई प्रभावाली गेस्ट कैंटीन में आने वाला था. मालिक ने Dilip Kumar से पूछा कि तुम कुछ बना लेते हो ? दिलीप ने कहा

‘मैं सैंडविच अच्छा बना लेता हूं’. कुमार ने सैंडविच बनाई जिसकी गेस्ट ने जमकर तारीफ की. फिर तो Dilip Kumar का सैंडविच का धंधा भी चमक उठा और उन्होंने अपने घर वालों को पूना में काम करने की सारी बात बता दी.

फिल्मों में ऐसे आए दिलीप साहब

Dilip Kumar कैंटीन में काम ही कर रहे थे कि अचानक देविका रानी की नजर दिलीप पर पड़ी. फिर यूसुफ खान यानी अपने Dilip Kumar को मिली बॉलीवुड में एंट्री. देविका रानी ही ने यूसुफ खान को दिलीप कुमार का नाम दिया.

बॉलीवुड के बेताज बादशाह

1944 में ‘ज्वार भाटा’ फिल्म से दिलीप कुमार ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की.आपको बता दें कि Dilip Kumar ने केवल 54 फिल्मों में ही काम किया लेकिन ये सारी फिल्में एक से बढ़कर एक शाहकार साबित हुईं. Dilip Kumar को 8 बार फिल्म फेयर के अवॉर्ड से नवाजा गया है.
कलाम साहब के जीवन से जुड़े अनसुने और मजेदार किस्से

Leave a Reply