राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर अबतक की हर जानकारी, विवाद और योगदान भी जानिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देश में एक ऐसे संगठन के तौर पर जाना जाता है जो राष्ट्रवाद के लिए प्रतिबद्ध है. लेकिन संघ के बारे में ये भी धारणा है कि ये देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है जहां दूसरे धर्म के लोगों को दूसरी पंक्ति का समझा जाए.

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इसे सांप्रदायिक और हिंदूवादी विचारधारा वाला संगठन समझा जाता है. फिलहाल देश में बीजेपी की सरकार है जिसका पितृ संगठन आरएसएस ही है. ऐसे में गाहे बगाहे आरएसएस और बीजेपी पर कई आरोप लगते हैं. इन आरोपों को समझने और आरएसएस के बारे में हर एक बात यहां जाने-
डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी स्थापना

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना साल 1925 में दशहरे के अवसर पर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी. इसका मुख्यालय नागपुर मे हैं.
  • फिलहाल आरएसएस के चीफ यानी सरसंघचालक मोहन भागवत हैं.
  • आरएसएस को दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन माना जाता है.
  • सिर्फ 5 लोगों से शुरुआत करने वाले आरएसएस की फिलहाल देश में 60 हजार से ज्यादा शाखाएं चलती हैं.
  • देश के पीएम नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई नेता और मंत्रियों ने इसी संगठन में काम करते हुए राजनीति में अपना मुकाम हासिल किया है.

आरएसएस की शाखा क्या हैं ?

  • आरएसएस अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए दुनियाभर में शाखा चलाता है. इस शाखा में कई तरह की गतिविधियां कराई जाती हैं.
  • आरएसएस की शाखाएं दुनिया के 30 से ज्यादा देशों में हैं. जहां पर सारी गतिविधियों भारत की शाखाओं जैसी ही होती हैं.
  • सुबह लगने वाली शाखा को ‘प्रभात शाखा‘ कहा जाता हैं. शाम को लगने वाली शाखा को ‘सायं शाखा‘ कहते है.
  • आरएसएस की शाखाओं के अंत में एक प्रार्थना की जाती है, इस प्रार्थना को साल 1940 से शुरू किया गया थे. इसके बोल हैं- नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे…..
  • सिर्फ हिंदुओं के लिए ही नहीं आरएसएस मुस्लिमों के लिए भी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच नाम का संगठन चलाती है जिसके फिलहाल हजारों की संख्या में सदस्य हैं. कश्मीर में ये संस्था खासी सक्रिय है.

आरएसएस के कुछ खास नियम

  • आरएसएस का प्रचारक बनने के लिए किसी स्वयंसेवक को 3 साल की ट्रेनिंग में हिस्सा लेना होता है. वहीं शाखा प्रमुख बनने के लिए अलग से ट्रेनिंग लेनी होती है.
  • आरएसएस का अपना भगवा रंग का झंडा है, जिसको हर शाखा में फहराया जाता है. आरएसएस के लिए इस झंडे का सबसे ज्यादा सम्मान है.
  • आरएसएस की शाखाओं में महिलाएं शामिल नहीं होती.
  • आरएसएस के सभी स्वयंसेवकों को आजीवन अविवाहित रहना होता है. लेकिन संघ के विस्तारों की भी एक कैटेगरी होती है जो शादी कर सकते हैं.
  • आरएसएस का अपना ड्रेस कोड है जिसमें सफेद कलर की शर्ट, खाकी कलर की हाफ पैंट, काली टोपी और चमड़े के जूते शामिल हैं. लेकिन हाल ही में इस हाफ पैंट को बदलकर भूरे कलर की फुलपैंट में तब्दील कर दिया गया है.

कई युद्धों, आपातकालीन हालात में आरएसएस का योगदान
हालांकि, आरएसएस की आलोचना आजादी के बाद से ही होती आई है. लेकिन कई युद्धों, प्राकृतिक आपदा की स्थिति में इस संगठन ने बिना किसी जाति, धर्म को देखे हुए कई नेक काम किए हैं-

  • आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने अक्टूबर 1947 से कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखी. ऐसे समय में जब सरकार और कश्मीर के राज हरिसिंह नहीं कर पाए थे. शरणार्थियों को राहत शिविर तक पहुंचाने और मदद करने में भी संघ सबसे आगे रहा था.
  • 1962 में चीन से युद्ध के दौरान सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद, और खाना रसद आपूर्ति में संघ का बड़ा योगदान रहा. जिसके बाद साल 1963 में गणतंत्र दिवस के परेड में तात्कालीन नेहरु सरकार ने आरएसएस को भी आमंत्रित किया था. यहीं नहीं 1965 के युद्ध में भी रक्तदान और तमाम दूसरे कामों में आरएसएस आगे रहा.
  • आपातकाल के समय संघ ने भूमिगत रह कर आंदोलन शुरू किया था. सड़कों पर पोस्टर चिपकाकर, लोगों को सूचनाए देकर वो देश को जागृत करते रहे.
  • प्राकृतिक आपदाओं जैसे कश्मीर बाढ़, ओडिशा में चक्रवात के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने खुद जाकर लोगों की मदद की थी. भोपाल गैस त्रासदी के दौरान भी संघ के लोग आगे रहे थे.

विवादों से भी रहा है नाता

  • गांधीजी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का नाम संघ से जुड़ता रहा है. इसके बाद ही गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने संघ पर बैन लगा दिया था. लेकिन बाद में साल 1949 में ये बैन हटाना पड़ा था.
  • माना जाता है कि संघ पर हमेशा से सवर्ण हिंदुओं का ही एकाधिकार रहा है, दूसरी छोटी जातियों के लोगों को उस समान अधिकार नहीं दिया जाता है. ऐसे में संघ को ब्राह्मणवादी सोच से ग्रसित माना जाता है.

देश की आजादी में संघ का क्या योगदान है इस पर सवाल उठते आए हैं. कहा जाता है कि संघ की ऐसा कोई भी सबूत नहीं थी जिसके आधार पर कहा जा सके कि आजादी की लड़ाई में संघ ने बहुत बड़ा योगदान दिया था.

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