कैसे हुआ कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन का एनकाउंटर…वीरप्पन के बारें जाने हर एक बात

खूंखार डाकू और चंदन तस्कर वीरप्पन का नाम तो आपने सूना ही होगा. वीरप्पन ने 20 सालों तक अपुने नाम का डंका बजाया. साल 2004 में वीरप्पन को एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था. अब उस एनकाउंटर का नेतृत्व करने वाले विज कुमार ने एक किताब लिखी है- वीरप्पन: चेजिंग द ब्रिगेड. जिसमें वीरप्पन के एनकाउंटर से जु़ड़ी कुछ खास बातें हैं..आइए जानते हैं सिलसिलेवार ढंग से हर एक बात-

चंदन तस्कर वीरप्पन

– किताब में साल 1952 में गोपीनाथम में उसके जन्म से लेकर साल 2004 में पाड़ी में हुए मुठभेड़ के दौरान उसको मारने की योजना के बारे में विस्तार से बताया गया है.
-कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन के बारें में एक खास बात का जिक्र किताब में है कि वीरप्पन महज आवाज सुनकर ही तमिलनाडु एसटीएफ के जवानों को पहचान सकता था. इसलिए वीरप्पन के एनकाउंटर के समय एसटीएफ ने शब्दों से संकेत देने की बजाय संख्या का उपयोग करने की नीति को अपनाया था.
– आवाज पहचानने वाली बात का खुलासा खुद उसके गिरोह के सदस्यों ने आत्मसमर्पण के दौरान किया था. वीरप्पन को एक एसटीएफ के इंस्पेक्टर की भाषा बहुत पसंद थी, वो इंस्पेक्टर शुद्ध तमिल में बात किया करता था, जिसका वीरप्पन पूरा मजा लिया करता था.
– वीरप्पन की खासियत को समझकर एसटीएफ ने संख्या के आधार पर संकेत की रणनीति बनाई थी. जिसमें 60 वर्ग किमी के इलाके को छोटे-छोटे खानों में बांट लिया गया था. हर खाने में एक काल्पनिक घड़ी लगाई गई थी. जवान अपनी स्थिति की जानकारी आपस में साझा करने के लिए घड़ी की स्थितियों का इस्तेमाल करते थे. जिसके बारे में एसटीएफ के लोग तो आसानी से समझ जाते थे लेकिन बात सुनने वाले वीरप्पन के लोगों को इसके बारे में समझ नहीं आता. संख्याओं की रणनीति को समझने की कोशिश में वीरप्पन लगातार परेशान रहता था कि एसटीएफ न जाने किस दिशा से हमला बोल दे.
– रिपोर्ट्स के मुताबिक वीरप्पन के पास एक सस्ता सा आईकॉम वायरलेस सेट था, जिससे वो एसटीएफ की बातचीत सुनता था. ऐसा ही वायरलेस सेट लिट्टे और दूसरे संगठन भी इस्तेमाल किया करते हैं.
ये तो हुई वीरप्पन के एनकाउंटर की कहानी अब जानिए वीरप्पन के बारे में कुछ रोचक जानकारी
चंदन तस्कर वीरप्पन

– वीरप्पन ने महज 10 साल की उम्र में ही क्राइम की दुनिया में कदम रख लिया था, 52 साल की उम्र में उसको मौत के घाट उतारा गया.
– कन्नड़ के मशहूर अभिनेता राजकुमार का वीरप्पन ने अपहरण किया था. उनको छोड़ने के एवज में मिले पैसे से वीरप्पन ने अपने घर को नया लुक दिया. एम एफ हुसैन की पेंटिंग भी लगवाई थी. एम एफ हुसैन का बड़ा प्रशंसक था वीरप्पन.
– तस्करी से कमाई गई अकूत दौलत के बाद भी वीरप्पन के पास ब्लैक एंड वाइट टेलीविज़न, पुराना टेप रिकॉर्डर जरूर रहता था. उसने अपने गंदे पुराने कपडो की जगह कभी भी डिजायनर या मंहगे कपड़े नहीं पहने
– वीरप्पन के बारें में एक बात काफी कु्ख्यात हैं. उसने एक शख्स की हत्या कर उसका गला काट लिया और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सिर से फुटबॉल भी खेला था.
– वीरप्पन के पास खुद की एक फौज थी, जो उसके इशारों पर कुछ भी करने को हमेशा तैयार रहा करती थी.
– उसने मुत्थुलक्ष्मी से शादी की थी, शादी के पास उसने एक किराने की दुकान भी खोली थी और छोटे से घर में अपनी पत्नी और बच्चे को रखा था.

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