टूटने के कगार पर पहुंची तमिलनाडु की AIDMK पार्टी बनाने वाले एमजी रामचंद्रन के बारें में 8 बेहद खास बातें

तमिलना़डु की सबसे बड़ी पार्टी AIDMK में फूट पड़ चुकी है, AIDMK महासचिव शशिकला नटराजन और पन्नीरसेल्वम आमने सामने हैं, ऐसे में पार्टी में टकराव और नुकसान तय है, AIDMK की स्थापना तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और करिश्माई अभिनेता एमजी रामचंद्रन ने की थी. एमजीआर ने जयललिता को भी ना केवल राजनीति के सबसे बड़े सितारों में शुमार कराया वहीं सिनेमा के पर्दे पर भी जयललिता को स्थापित करने में एमजी रामचंद्रन का ही पूरा हाथ है.
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1.5 दिसंबर 2016 को तमिलनाडु की सीएम और लाखों दिल पर राज करने वाली जयललिता नहीं रहीं. आपकों बता दें कि 29 साल पहले 24 दिसंबर 1987 को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में ही एमजी रामचंद्रन उर्फ एमजीआर का निधन हुआ था.
2.15 साल की जयललिता ने जब बड़े पर्दे पर अपना पहला किरदार निभाया तो उन्हें नहीं पता था कि वो रिअल लाइफ में भी लार्जर देन लाइफ किरदार बनने वाली हैं. जयललिता को फिर फिल्मों में एमजीआर का साथ मिला, 1965 से 1972 तक एमजीआर ने अधिकत्तर फिल्में जयललिता के साथ की, जयललिता ने ही फिल्मों में स्कर्ट पहनने की शुरूआत की थी.
3.एमजीआर ने तमिल सिनेमा में करीब 30 वर्षों तक काम किया. इस दौरान उन्होंने 100 से ज्यादा फिल्में की, एमजीआर पहले ऐसी फिल्मी हस्ती थे जो किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनें. एमजीआर के फिल्मों के किरदार को लोग असली मानने लगे थे. उन्हें भगवान की तरह भी पूजा जाने लगा था.
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4. एमजीआर शुरू से ही जयललिता की खूब तारीफ किया करते थे. फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली जयललिता बाकि अभिनेत्रियों से अलग थी. बेहद शांत और पढ़ाई करने वाली थी जयललिता. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एक बार थार रेगिस्तान में शूटिंग चल रही थी जहां जयललिता औऱ एमजीआर दोनों मौजूद थे. रेत इतना गर्म था कि जयललिता चल नहीं पा रही थी. फिर एमजीआर ने पीछे से आकर उन्हें गोद में उठा लिया ताकि उनका पैर ना जलें
5. एमजीआर ने अपनी राजनीतिक पारी कांग्रेस से शुरू की बाद में वो 1953 में डीएमके पार्टी में शामिल हो गए. विवादों के बाद साल 1972 में एमजीआर ने खुद की पार्टी एआईडीएमके यानी ऑल इंडिया द्रविण मुनेत्र कणगम की स्थापना की और इसी साल 1977 में इसी पार्टी की धमाकेदार जीत के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनें
6.साल 1967 में एमजीआर को जान से मारने की कोशिश की गई. एमजी आर के दोस्त और उनके साथ फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता और नेता एम आर राधा ने उन्हें गोली मारी थी. सबसे पहले राधा ने उन्हें एक फिल्म का आईडिया सुनाने के बहाने बुलाया फिर बातचीत के दौरान ही अचानकर खड़े होकर उन्हें कान में दो गोली मार दी. और खुद भी खुदकुशी करने का प्रयास किया.
7.इस हत्या के प्रयास के बाद एमजीआर बच तो गए लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी आवाज बदल गई. साथ ही वो अब एक कान से सुनने की क्षमता भी खो बैठे
8.1987 में एमजीआर का निधन हुआ तो उनके परिवार वालों ने जयललिता को घर में घुसने नहीं दिया. जयललिता को फिर पता चला कि एमजीआर के पार्थिव शरीर को पिछले दरवाज़े से राजाजी हॉल ले जाया गया है. जयललिता तुरंत अपनी कार में बैठकर वहां पहुंची. वहां वो किसी तरह अपने आप को एमजीआर के सिरहाने पहुंचाने में सफ़ल हो गईं. जयललिता को एमजीआर से दूर रखने की बहुत कोशिश हुई लेकिन तमाम अपमान सहकर भी जयललिता तीन दिन तक एमजीआर के शव के पास खड़ी रहीं.

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